February 20, 2026 4:28 am

“सिम कार्ड मेरा, मोबाइल मेरा… फिर इनकमिंग पर ताला क्यों?” इनकमिंग कॉल बंद कर वसूला जा रहा ‘किराया’, उपभोक्ताओं में आक्रोश

अब्दुल सलाम क़ादरी

देशभर में मोबाइल उपभोक्ताओं के बीच एक नया सवाल तेजी से उठ रहा है—जब सिम कार्ड और मोबाइल दोनों हमारे हैं, तो फिर बैलेंस खत्म होते ही इनकमिंग कॉल पर रोक क्यों? उपभोक्ताओं का कहना है कि आउटगोइंग बंद होना समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल बंद कर देना सीधे-सीधे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है।

क्या है पूरा मामला?

मोबाइल कंपनियां प्रीपेड ग्राहकों से नियमित रिचार्ज की अनिवार्यता रखती हैं। तय वैधता खत्म होते ही न सिर्फ आउटगोइंग कॉल, बल्कि कई मामलों में इनकमिंग कॉल भी सीमित या बंद कर दी जाती है। ऐसे में जिन लोगों का फोन केवल जरूरी कॉल रिसीव करने के लिए है—जैसे मजदूर, ग्रामीण उपभोक्ता, बुजुर्ग या विद्यार्थी—वे सीधे प्रभावित होते हैं।

उपभोक्ताओं की आपत्ति

उपभोक्ताओं का तर्क है:

  • इनकमिंग कॉल रिसीव करने पर कंपनी का कोई विशेष खर्च नहीं होता, फिर इसे बंद करना अनुचित है।
  • यह व्यवस्था गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों पर ‘रेंट’ वसूलने जैसा है।
  • जिनके पास नियमित रिचार्ज कराने की क्षमता नहीं, वे संपर्क से कट जाते हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

टेलीकॉम विशेषज्ञों के अनुसार कंपनियां नेटवर्क मेंटेनेंस, स्पेक्ट्रम शुल्क और अन्य परिचालन खर्चों का हवाला देती हैं। उनका कहना है कि न्यूनतम रिचार्ज से ही सेवा चालू रखना व्यावसायिक मॉडल का हिस्सा है। हालांकि उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इनकमिंग सुविधा को बेसिक सर्विस के रूप में बनाए रखना चाहिए, ताकि संचार का अधिकार प्रभावित न हो।

सरकार और नियामक की भूमिका

लोगों की मांग है कि दूरसंचार नियामक संस्था इस मुद्दे पर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करे और कम-आय वर्ग के लिए न्यूनतम या मुफ्त इनकमिंग सुविधा सुनिश्चित करे। डिजिटल इंडिया के दौर में संचार सुविधा को मूलभूत आवश्यकता माना जा रहा है, ऐसे में इनकमिंग कॉल बंद करना नीति पर सवाल खड़े करता है।

बड़ा सवाल

क्या टेलीकॉम कंपनियों का यह कदम व्यावसायिक मजबूरी है या फिर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली का तरीका?
जब मोबाइल और सिम उपभोक्ता के हैं, तो क्या केवल बैलेंस न होने पर इनकमिंग कॉल बंद करना जायज है?

इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी लोग खुलकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। अब देखना यह है कि संबंधित प्राधिकरण और कंपनियां आम उपभोक्ताओं की इस पीड़ा पर क्या फैसला लेती हैं।

salam india
Author: salam india

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